ग्रामसभा सशक्तिकरण अभियान
ग्रामसभा सशक्तिकरण अभियान
पेसा ग्रामसभा : केन्द्र ने 1996 में पेसा कानून पूरे देश में लागू किया, पेसा को राज्य में लागू करने के लिए विधान मंडल में कानून बनाया जाना था, लेकिन मध्यप्रदेश में नियम बनाया गया जो 15 नवंबर 2022 से म.प्र. के अनुसूचित क्षेत्रों में लागू हुआ, इस नियम में स्पष्ट है कि ग्रामसभा ग्राम की पारंपरिक सीमा का मालिक है। इस कानून में ग्राम के विकास हेतु पंचायत को प्रस्ताव, वन उपज संग्रहण एंव विक्रय, जल प्रबंधन, शराब एंव नशे की सामग्री पर निंयत्रण, भूमि अधिग्रहण पर ग्रामसभा की सहमति, ग्राम में कार्यरत शासकीय अशासकीय विभागों का निरिक्षण, पारंपरिक रीति रिवाज पंरपराओं का संरक्षण, खनिज संपदा, ग्राम में आपसी समझौता ग्राम न्यायालय में आपसी लड़ाई झगड़े का निपटान आदि अन्य विषयों पर ग्रामसभा सशक्त हो कार्यवाही करेगी।
वन अधिकार ग्रामसभा : वन अधिकार ग्रामसभा वन अधिकार मान्यता कानून 2006 के क्रियान्यवयन हेतु ग्राम में ग्रामसभा की समस्त कार्यवाही हेतु वन अधिकार ग्रामसभा को सशक्त करना।
रूढ़ी प्रथा पारंपरिक ग्रामसभा का सशक्तिकरण :
ग्राम में ग्राम की बसाहट के साथ ही पारंपरिक ग्रामसभा का गठन सदियों से चला आ रहा है जो ग्राम में शांति व्यवस्था, ग्राम में न्यायिक व्यवस्था, संस्कृति रीति रिवाज पंरपराओं का संरक्षण, धार्मिक व्यवस्थाओं का संरक्षण, पारंपरिक सीमा का प्रबंधन करते आ रही है जिसमें ग्राम में मुकददम पटेल मुखिया होता है एंव अन्य दिवान, कोटवार, बैगा भुमका, आदि पदेन सदस्य पीढ़ी दर पीढ़ी पारंपरिक रूप से संचालित होते आ रहे है वर्तमान में पांरपरिक कोटवार को शासकीय कोटवार नियुक्त कर दिया गया है। ग्राम मुकददम पटेल राजस्व जमा वसूलते थे वह पंरपरा भी अब बंद हो गई है। पांरपरिक ग्रामसभा का सशक्तिकरण अभियान